Thursday, January 13, 2011
Monday, January 10, 2011
Sunday, January 9, 2011
Thursday, December 30, 2010
कालजयी
काल ,तुमने सबको हर लिया,
तुमने छिना राम ,कृष्ण को ,
वर्त्तमान को बदला अतीत मैं ,
पर
याद तो अमर ,अजर है
स्मृति के आदि न अंत
उसने जीता काल चक्र को ,
याद
बस वही चिरंतन,वर्त्तमान
जय किया काल को बन कालजयी
उसे अतीत बना कर बताओ .
published in kadambini masik patrika on 1994 october
written by sangeeta pandey.
तुमने छिना राम ,कृष्ण को ,
वर्त्तमान को बदला अतीत मैं ,
पर
याद तो अमर ,अजर है
स्मृति के आदि न अंत
उसने जीता काल चक्र को ,
याद
बस वही चिरंतन,वर्त्तमान
जय किया काल को बन कालजयी
उसे अतीत बना कर बताओ .
published in kadambini masik patrika on 1994 october
written by sangeeta pandey.
Monday, December 20, 2010
'जाने न देना '
खोल दो हर गवाक्ष, हर द्वार ,
आने दो आज ठंडी बयार,
साफ़ कर दो मकड़ी के जाले
बुने थे जो दर्द के रेशे से,
धो पोंछ लो हर गर्द को ,
मायूसी के थे जो विषाद के.
नमीत कोरों में सुरमें लगा लो ,
सुना है ,खुशी निकली है सफ़र पे,
शायद गुजरे तुम्हारे दर से ,
ज़र्रे ज़र्रे मैं खुशबू बिखरने लगी,
सहमी जुबान से आवाज न देना,
माना अरसे से उदासी में जिया ,
इस बार उसे गिरह में बांध लेना.
आने दो आज ठंडी बयार,साफ़ कर दो मकड़ी के जाले
बुने थे जो दर्द के रेशे से,
धो पोंछ लो हर गर्द को ,
मायूसी के थे जो विषाद के.
नमीत कोरों में सुरमें लगा लो ,
सुना है ,खुशी निकली है सफ़र पे,
शायद गुजरे तुम्हारे दर से ,
ज़र्रे ज़र्रे मैं खुशबू बिखरने लगी,
सहमी जुबान से आवाज न देना,
माना अरसे से उदासी में जिया ,
इस बार उसे गिरह में बांध लेना.
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